8 जनवरी 2013 - 20:30

ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फ़रीदून अब्बासी ने कहा है कि तेहरान परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी की परिधि से बाहर की मांगों को नहीं मानेगा।

ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फ़रीदून अब्बासी ने कहा है कि तेहरान परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी की परिधि से बाहर की मांगों को नहीं मानेगा।उन्होंने बुधवार को साक्षात्कार में जब उनसे आईएईए के साथ ईरान की आगामी वार्ता के बारे में पूछा गया तो कहा कि यदि आईएईए के प्रतिनिधि तेहरान पूर्वाग्रह के साथ आते हैं और ईरान के अधिकार की अनदेखी करते हैं तो वार्ता का सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा।ज्ञात रहे ईरान और आईएईए के बीच 13 दिसंबर 2012 को वार्ता हुयी थी जिसके बाद आईएईए के उपनिदेशक हरमैन नेकैर्ट्स ने कहा था कि वार्ता में प्रगति हुयी और 16 जनवरी को और बातचीत होगी।फ़रीदून अब्बासी ने कहाः यदि आईएईए के प्रतिनिधि तेहरान बिना पूर्व शर्त और सही शैली के साथ आते हैं, उनका उद्देश्य वास्तविकता को समझना है और ईरान के अधिकार को दृष्टिगत रखेंगे तो हम हम अगली वार्ता में अवश्य किसी परिणाम तक पहुंचेगे।उन्होंने बताया कि देश की आवश्यकता के 5 प्रतिशत तक युरेनियम का संवर्धन नतंज़ के परमाणु प्रतिष्ठान और 20 प्रतिशत तक युरेनियम का संवर्धन फ़ोर्दो और नतंज़ परमाणु प्रतिष्ठानों में जारी है।ज्ञात रहे अमरीका और उसके कुछ घटक ईरान पर शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की आड़ में परमाणु शस्त्रों की प्राप्ति के प्रयास का आरोप लगाते हैं और इसी आरोप के बहाने अमरीका ने ईरान पर एकपक्षीय प्रतिबंध लगा दिए हैं जबकि ईरान का कहना है कि उसकी समस्त परमाणु गतिविधियां शांतिपूर्ण हैं जो आईएईए के निरीक्षण में जारी हैं और वह परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी के सदस्य देश के नाते शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए परमाणु ऊर्जा के प्रयोग के अपने मूल अधिकार पर बल देता है।आईएईए ने भी ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों का अनेक बार निरीक्षण किया है और उसे ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे पश्चिमी देशों के आरोपों की पुष्टि हो।इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने भी परमाणु शस्त्रों के निर्माण के वर्जित होने का फ़तवा दिया है।ज़ायोनी परमाणु प्रतिष्ठान में काम करने वाले मर्दख़ाय वनूनो की सूचना के आधार पर जो उन्होंने 1980 के दशक में द संडे टाइम्ज़ को दी थी, अधिकाशं विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय ज़ायोनी शासन के पास 200-300 परमाणु वारहेड्स हैं।मध्यपूर्व में 200 से अधिक परमाणु वारहेड्स से संपन्न ज़ायोनी शासन से पश्चिमी देश यह तक नहीं पूछते कि वह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की अनुमति क्यों नहीं देता और परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी से क्यों नहीं जुड़ता।..........166